रंगों की दुनिया
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रंगों की दुनिया

Translation: The World of Colors

कला प्रदर्शनी में, निया एक खूबसूरत पेंटिंग के सामने खड़ी थी। पेंटिंग में नीले और हरे रंगों का अद्भुत मिश्रण था। निया उसकी गहराई में खोई हुई थी। तभी, राघव ने उसे देखा। उसने सोचा, "क्या यह लड़की इस पेंटिंग की कहानी समझती है?"

राघव ने धीरे-धीरे निया के पास जाकर पूछा, “क्या आपको यह पेंटिंग पसंद है?” निया ने चौंककर उसकी ओर देखा। “हाँ, यह बहुत सुंदर है! यह मुझे समुद्र की याद दिलाती है,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।

“मुझे भी! यह रंगों का खेल कितनी खूबसूरती से दर्शाता है,” राघव ने उत्तर दिया। उनकी आंखों में एक हल्की चमक थी, जैसे रंगों की दुनिया में कोई जादू छिपा हो।

“आप कलाकार हैं?” निया ने उत्सुकता से पूछा। “नहीं, मैं तो बस एक कला प्रेमी हूँ। लेकिन मैं हमेशा कला की गहराई में जाना चाहता हूँ,” राघव ने कहा।

इस बातचीत के दौरान, दोनों के बीच एक अनकही समझ बन गई। राघव ने कहा, “क्या आप मेरे साथ इस प्रदर्शनी की और पेंटिंग्स देखना चाहेंगी?”

निया ने खुशी से हामी भरी। “हाँ, क्यों नहीं! मुझे कला के बारे में और जानने में खुशी होगी।”

वे दोनों साथ-साथ प्रदर्शनी में घूमने लगे। रंगों की दुनिया में खोकर, निया और राघव ने अपनी नई दोस्ती की शुरुआत की। उनकी मुलाकात ने एक नई कहानी को जन्म दिया, जो रंगों की तरह ही खूबसूरत थी।