हाथी का उपचार
जंगल में एक बड़ा हाथी था, जिसका नाम राजा था। राजा का एक छोटा दोस्त, चिंकी, एक प्यारा सा बंदर था। एक दिन, चिंकी अचानक बीमार पड़ गया। राजा ने चिंकी को देखकर चिंतित होकर कहा, "चिंकी, तुम ठीक नहीं लग रहे हो। तुम्हें क्या हुआ?"
चिंकी ने कमजोर आवाज में कहा, "राजा, मुझे बहुत बुखार है। मैं ठीक नहीं हो पा रहा।" राजा ने सोचा कि उसे चिंकी के लिए कोई इलाज ढूंढना होगा। उसने जंगल के अन्य जानवरों से मदद मांगी।
राजा ने सबसे पहले गिलहरी से पूछा, "गिल्ली, क्या तुम जानती हो कोई ऐसा पौधा जो चिंकी का उपचार कर सके?" गिल्ली ने कहा, "हां, एक पुराना पौधा है, लेकिन वह बहुत दूर है। तुम्हें जंगल के दूसरे हिस्से में जाना होगा।"
राजा ने हिम्मत न हारते हुए कहा, "मैं जाऊंगा। चिंकी का स्वास्थ्य मेरी जिम्मेदारी है।" उसने अपनी यात्रा शुरू की और कई जानवरों से रास्ता पूछा।
अंत में, राजा एक बूढ़ी गिलहरी से मिला। गिलहरी ने कहा, "तुम्हें इस पौधे की जड़ को लाना होगा। यह जड़ी-बूटी बहुत प्रभावी है।" राजा ने धन्यवाद कहा और जड़ लाने के लिए जंगल में गहराई तक गया।
जब राजा ने जड़ लाकर चिंकी को दी, तो चिंकी ने उसे खाया और धीरे-धीरे ठीक होने लगा। राजा ने खुशी से कहा, "देखो, हमारी जंगल की चिकित्सा कितनी शक्तिशाली है!"
इस घटना ने राजा और चिंकी को यह सिखाया कि समुदाय की ताकत और पारंपरिक ज्ञान से ही हम एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं।