बगीचे का राज़
एक छोटे से गाँव में, राधिका अपनी दादी के साथ रहती थी। उसकी दादी का एक सुंदर बगीचा था। बगीचे में बहुत सारे फूल थे, लेकिन राधिका को गुलाब की झाड़ी सबसे पसंद थी।
एक दिन, राधिका ने देखा कि पड़ोसी की कीमती गुलाब की झाड़ी अचानक गायब हो गई। "यह कैसे हुआ?" राधिका ने सोचा। वह अपने दोस्तों, मोहन और सिमा, को बुलाने लगी। "हमें यह पता लगाना होगा!"
मोहन ने कहा, "शायद किसी ने इसे चुरा लिया।" सिमा बोली, "हमें सबसे पहले पूछताछ करनी चाहिए।" तीनों दोस्त गाँव के लोगों से पूछने लगे।
उन्होंने गाँव के बुजुर्ग से पूछा। वह बोले, "कल रात मैंने एक कुत्ता देखा। वह बगीचे के पास भौंक रहा था।" राधिका ने कहा, "शायद वह कुत्ता कुछ जानता है!"
तीनों दोस्तों ने अगले दिन कुत्ते का पीछा किया। कुत्ता उन्हें एक पेड़ के नीचे ले गया, जहाँ गुलाब की झाड़ी छिपी थी। "हमने इसे ढूँढ लिया!" राधिका ने खुशी से कहा।
गाँव के सभी लोग खुश हुए। राधिका, मोहन, और सिमा ने मिलकर गुलाब की झाड़ी को वापस लाया। "हमने मिलकर एक अच्छा काम किया," मोहन ने कहा।
राधिका ने सोचा, "परिवार और दोस्ती से हम हर राज़ का हल निकाल सकते हैं।" और इस तरह, सबने मिलकर बगीचे का राज़ सुलझाया।