बच्चों की किताबों की दुकान
Translation: Children's Bookstore
शहर के एक छोटे से मोहल्ले में एक किताबों की दुकान थी। दुकान के बाहर एक साइन बोर्ड लटका था, जिस पर लिखा था, "ज्ञान की दुनिया में आपका स्वागत है!" बच्चों की मासूमियत और जिज्ञासा हमेशा इस दुकान को जीवंत बनाए रखती थी।
एक दिन, नंदिता और उसके दोस्त राघव और सिया किताबों की दुकान में गए। नंदिता ने उत्सुकता से पूछा, "क्या तुमने कभी सोचा है कि किताबें कितनी जादुई होती हैं?" राघव ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, हर किताब एक नई कहानी कहती है।"
सिया ने एक रंग-बिरंगी किताब उठाई और बोली, "ये तो सपनों की तरह लगती है! क्या इसमें सचमुच जादू है?" नंदिता ने कहा, "अगर हम इसे पढ़ते हैं, तो हमें पता चलेगा!"
तीनों दोस्त किताबों के बीच में बैठ गए और अपने-अपने पसंदीदा विषयों की किताबें खोजने लगे। नंदिता ने एक विज्ञान की किताब चुनी, राघव ने कहानी की और सिया ने चित्रों वाली किताब।
तभी दुकानदार ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हारी जिज्ञासा का कोई मोल नहीं। यही तो हमारे समाज का भविष्य है!" बच्चों ने एक-दूसरे को देखा और उनकी आंखों में चमक आ गई।
उनकी मासूमियत ने दिखाया कि शिक्षा ही समाज को बदल सकती है। किताबों की दुकान में बिताया गया वह पल, भविष्य की आशा का प्रतीक बन गया।