खिड़की के पार
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A2

खिड़की के पार

Translation: Beyond the Window

एक दिन, छोटे अजय ने अपनी खिड़की से बाहर देखा। वह हमेशा अपने शहर की बोरिंग गलियों को देखता था। लेकिन आज कुछ अलग हुआ। अचानक, उसे एक चमकदार रोशनी दिखाई दी।

"क्या यह क्या है?" अजय ने सोचा। उसने ध्यान से देखा। बाहर, एक रंग-बिरंगी दुनिया थी। वहाँ उसके सपनों के पात्र, जैसे एक नीला ड्रैगन और एक हंसता हुआ गिलहरी, खेल रहे थे।

"अजय, आओ! हमारे साथ खेलो!" गिलहरी चिल्लाई। अजय की आँखें चमक उठीं। वह तुरंत खिड़की से बाहर कूदना चाहता था।

"क्या मैं आ सकता हूँ?" अजय ने पूछा। ड्रैगन ने कहा, "हाँ, बस अपनी आँखें बंद करो और सोचो।"

अजय ने आँखें बंद कीं। जब उसने फिर से आँखें खोलीं, वह उस जादुई दुनिया में था। अब वह अपने सपनों के साथ खेल रहा था।

उस दिन अजय ने सीखा कि कल्पना की दुनिया कितनी सुंदर होती है। कभी-कभी, बस खिड़की के पार देखना चाहिए।